मुझे अपना पीसीओडी टेस्ट कब करवाना चाहिए?HealthPlanet

Posted on Sat 3rd Dec 2022 : 15:14

जब महिलाओं में प्रजनन से संबंधित हार्मोन का संतुलन बिगड़ने लगता है तो पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओडी/पीसीओएस) हो जाता है| पीसीओएस में पुरुष हार्मोन यानी एंड्रोजन का स्तर बहुत बढ़ जाता है| यदि आप किसी भी लक्षण का अनुभव करते हैं जैसे- पीरियड मिस होना, मुंहासे या ऑयली त्वचा, वजन बढ़ना और शरीर पर अतिरिक्त बाल, तो अपने स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें और खुद की जांच करवाएं, इलाज में किसी भी तरह की देरी से स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं हो सकती हैं। पीसीओडी-पीसीओएस का इलाज स्थिति की गंभीरता के आधार पर आपकी जीवनशैली, उचित दवा या ऑपरेशन कराने की सिफारिश की जा सकती है।

आजकल पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) की समस्या तेजी से बढ़ रही है. पहले ये समस्या 30 से 35 साल की महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलती थी, लेकिन अब 18 से 20 साल की लड़कियों में भी पीसीओडी की दिक्कत आम हो गई है. इस समस्या को पीसीओएस (PCOS) के नाम से भी जाना जाता है| पीसीओडी एक हार्मोनल समस्या है जो हमारे खराब लाइफस्टाइल की देन है|

इसमें अंडेदानी में छोटी छोटी गांठें बन जाती है| इसके कारण कई तरह की हार्मोनल परेशानियां होने लगती हैं पीसीओएस वाली महिलाएं ग्लूकोज असहिष्णुता, टाइप 2 डायबिटीज मेलिटस,यकृत स्टीटोसिस और मेटाबोलिक सिंड्रोम, उच्च रक्तचाप, डिसलिपिडेमिया, संवहनी घनास्त्रता, सेरेब्रोवास्कुलर दुर्घटनाओं और संभवतः हृदय संबंधी घटनाओं के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं। इसलिए इसका समय पर इलाज करवाना बहुत जरूरी होता है अन्यथा यह आगे बढ़ सकता है|


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